प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2025: के तहत भारत के 27 राज्यों में किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से हुए फसल नुकसान पर राहत दी जा रही है। खासकर जम्मू-कश्मीर, बिहार, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश में वर्षा और बाढ़ के कारण फसलें भारी नुकसान से प्रभावित हुई हैं। जानिए इस योजना के तहत कौन-कौन से राज्य कैसे मदद कर रहे हैं, प्रीमियम दरें, योजना के लाभ, और नुकसान का आकलन। और फसल बीमा का सही लाभ उठाएं।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2025:
देश के कई राज्यों में इस वर्ष भारी वर्षा और बाढ़ से फसलों को अभूतपूर्व नुकसान हुआ है। खासतौर पर जम्मू-कश्मीर, बिहार, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश समेत 27 राज्यों में किसान गंभीर संकट में हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत बीमा कराए किसान राहत पा रहे हैं। इस योजना ने किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आइए जानते हैं इस योजना के तहत किन-किन राज्यों में कैसे काम हो रहा है और किसानों को कैसे लाभ मिल रहा है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की आवश्यकता और उद्देश्य
कृषि क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन प्राकृतिक आपदाओं के चलते किसान अक्सर बड़े आर्थिक संकट में फंस जाते हैं। पीएमएफबीवाई की शुरुआत इस उद्देश्य से की गई थी कि किसानों को फसल नुकसान की स्थिति में आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। यह योजना किसानों के बीच फसल बीमा कवरेज बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें जोखिम प्रबंधन की सुविधा भी देती है। इसके तहत खरीफ और रबी दोनों फसलों का बीमा कराया जा सकता है।
Sukanya Samriddhi Yojana: सिर्फ ₹30,000 निवेश से पाएं ₹13.85 लाख, बेटियों के लिए सबसे सुरक्षित योजना
PM Kisan 21वीं किस्त: 4000 रुपये जल्द आपके खाते में, जानिए तारीख, चेक लिस्ट और पूरी प्रक्रिया अभी
जम्मू-कश्मीर में फसल बीमा
जम्मू-कश्मीर में यह योजना 2017 के खरीफ सीजन से लागू है। पहले वर्ष में 10 जिलों के 1,58,972 किसानों को कवर किया गया था, जो साल दर साल बढ़ता चला गया। 2023-24 में जम्मू-कश्मीर के 20 जिलों में कुल 2,45,628 किसान इस योजना का लाभ ले रहे हैं। यहाँ के किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान के मामलों में मुआवजा मिल रहा है।
बिहार में मुख्यमंत्री फसल सहायता योजना
बिहार राज्य में किसानों को निशुल्क फसल बीमा की सुविधा दी गई है। मुख्यमंत्री फसल सहायता योजना के तहत प्रभावित क्षेत्र के सभी किसान कवर होते हैं और उन्हें कोई प्रीमियम नहीं देना पड़ता। इसके अतिरिक्त, पश्चिम बंगाल में कृषक बंधु योजना के अंतर्गत किसानों को 10,000 रुपये प्रति वर्ष दिए जाते हैं। बंगाल शस्य बीमा योजना भी निशुल्क है, जिसमें किसान भूमि स्वामी के साथ-साथ बटाईदार भी आवेदन कर सकते हैं।
पंजाब में बीमा योजना
पंजाब राज्य में फिलहाल प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू नहीं है। वर्ष 2015 में जब यह योजना देशव्यापी लागू हुई थी, तब पंजाब सरकार ने इसे अपनाने से इनकार कर दिया था। वर्ष 2017 में कांग्रेस सरकार ने अपनी योजना प्रस्तावित की थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के चलते क्रियान्वयन नहीं हो पाया। हालांकि इस वर्ष फसल नुकसान के बढ़ते मामलों को देखते हुए पंजाब सरकार योजना को लागू करने की दिशा में चर्चा कर रही है।
उत्तराखंड में मौसम आधारित फसल बीमा योजना
उत्तराखंड में पीएमएफबीवाई के साथ-साथ मौसम आधारित फसल बीमा योजना भी कार्यान्वित की गई है। इसमें कुल 77,327 किसान शामिल हैं। कृषि विभाग ने बताया कि इस वर्ष राज्य में कृषि क्षेत्र में 339.47 हेक्टेयर और बागवानी क्षेत्र में 11,272.74 हेक्टेयर भूमि पर नुकसान हुआ है। इस योजना के तहत कृषि इंश्योरेंस कंपनी और एसबीआई जनरल इंश्योरेंस किसानों को मुआवजा प्रदान कर रहे हैं।
मध्य प्रदेश में योजना का विस्तार
मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 55 जिलों में लागू है। राज्य में कुल एक करोड़ 10 लाख किसान हैं, जिनमें से 90 लाख किसान इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। बाढ़ और अत्यधिक वर्षा से फसलों को हुए नुकसान पर किसानों को वित्तीय सहायता दी जा रही है। इससे किसान अपने आर्थिक संकट से उबर पाते हैं और अगले सीजन की फसल के लिए तैयार रहते हैं।
राजस्थान में सर्वे और मुआवजा वितरण
राजस्थान में कृषि मंत्री ने सर्वेक्षण के लिए विशेष निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत वर्तमान में 74 लाख किसान लाभान्वित हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को प्रति वर्ष तीन हजार रुपये की सहायता दी जा रही है। सर्वेक्षण के बाद मुआवजा वितरण की प्रक्रिया को शीघ्र शुरू किया जाएगा ताकि किसानों को आर्थिक संकट से राहत मिल सके।
हरियाणा में आठ वर्षों से लाभ
हरियाणा राज्य में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पिछले आठ वर्षों से चल रही है। राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि जिन किसानों ने बीमा पंजीकरण नहीं कराया, उन्हें प्रति एकड़ 15,000 रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। इस प्रकार, हरियाणा के किसानों को योजना के माध्यम से आर्थिक सुरक्षा प्राप्त हो रही है।
PM Kisan 21वीं किस्त: 4000 रुपये जल्द आपके खाते में, जानिए तारीख, चेक लिस्ट और पूरी प्रक्रिया अभी
उत्तर प्रदेश में नुकसान का आकलन
उत्तर प्रदेश में इस खरीफ सत्र में कुल 20,41,127 किसान पीएमएफबीवाई का लाभ ले रहे हैं। हालांकि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मुआवजा वितरण की प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है, लेकिन नुकसान का आकलन किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्राथमिकता से प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की योजना बनाई है। इससे प्रभावित किसानों को शीघ्र राहत मिलेगी।
योजना का विस्तार
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 27 राज्यों और संघ शासित प्रदेशों में लागू है। इनमें जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड व ओडिशा प्रमुख हैं। योजना का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना और कृषि उत्पादन में स्थिरता बनाए रखना है।
प्रीमियम दरें और सरकार की भूमिका
इस योजना के अंतर्गत खरीफ फसलों के लिए किसान को केवल 2.0% प्रीमियम देना होता है। वाणिज्यिक व बागवानी फसलों के लिए प्रीमियम दर 1.5% तय की गई है। बाकी का प्रीमियम केंद्र सरकार और राज्य सरकारें मिलकर देती हैं। कई राज्यों में यह प्रीमियम पूरी तरह से निशुल्क है। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक किसानों को योजना से जोड़ना है ताकि वे बिना आर्थिक भार के अपने खेतों का बीमा करा सकें।
हालांकि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए एक बेहतरीन कदम है, परन्तु कुछ चुनौतियाँ भी बनी हुई हैं। मुआवजा वितरण में देरी, सर्वेक्षण में पारदर्शिता की कमी, पंजीकरण प्रक्रिया में जटिलता और कुछ राज्यों में योजना का पूरी तरह से क्रियान्वित न होना प्रमुख मुद्दे हैं। सरकार इस दिशा में निरंतर सुधार कर रही है ताकि योजना और प्रभावी बन सके।
PM Kisan 21वीं किस्त: 4000 रुपये जल्द आपके खाते में, जानिए तारीख, चेक लिस्ट और पूरी प्रक्रिया अभी
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों को प्राकृतिक आपदाओं के कारण होने वाले नुकसान से बचाने में अहम भूमिका निभा रही है। वर्षा व बाढ़ जैसी विपरीत परिस्थितियों में यह योजना किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच का काम कर रही है। राज्य सरकारें इस योजना के माध्यम से अधिक से अधिक किसानों को जोड़कर उन्हें लाभ पहुंचा रही हैं। इससे किसानों का आत्मविश्वास भी बढ़ता है और वे कृषि कार्य में मनोयोग से लगे रहते हैं। भविष्य में यदि योजना को और प्रभावी बनाया जाए तो यह कृषि क्षेत्र में स्थायित्व लाने में और भी सफल साबित होगी।
धनतेरस से पहले किसानों की आय बढ़ाने की तैयारी; खेतों में उतरेंगे हजारों कृषि विशेषज्ञ